अमीर खुसरो ने बूझ पहेलियों (शब्द के आधार पर उ...
अमीर खुसरो ने बूझ पहेलियों (शब्द के आधार पर उत्तर ढूँढना) की रचना की। बूझ पहेली में पहेली का उत्तर क...
68 पहेलियां मिलीं
अमीर खुसरो ने बूझ पहेलियों (शब्द के आधार पर उत्तर ढूँढना) की रचना की। बूझ पहेली में पहेली का उत्तर क...
खडा भी लोटा, पडा भी लोटा, है बैठा पर ,कहे है लोटा, खुसरो कहे ,समझ का टोटा।
तरवर से इक तिरिया उतरी उसने बहुत रिझाया, बाप का उससे नाम जो पूछा आधा नाम बताया, आधा नाम पिता पर प्...
एक परख है सुंदर मूरत, जो देखे वो उसी की सूरत, फिक्र पहेली पायी ना, बोझन लागा आयी ना।
गोल मटोल और छोटा-मोटा, हर दम वह तो जमीं पर लोटा, खुसरो कहे नहीं है झूठा, जो न बूझे अकिल का खोटा...
फ़ारसी बोली आईना, तुर्की सोच न पाईना, हिन्दी बोलते आरसी, आए मुँह देखे जो उसे बताए ।
बाला था तब सबको भाया, बड़ा हुआ कुछ काम ना आया, खुसरो कह दिया उसका नाव, अर्थ बिचारो, नहि छोड़ो गाँव।
हाड़ की देहि, उज्जवल रंग, लिपटा रहे सबके संग, चोरी की, ना खून किया, वाका (उसका) सिर क्यों काट लिया ...
श्याम बरन और दाँत अनेक, लचकत जैसे नारी, दोनों हाथ से खुसरो खींचे और कहे तू आ री।
घूस घुमेला लहँगा पहिने, एक पाँव से रहे खडी, आठ हाथ हैं उस नारी के, सूरत उसकी लगे परी, सब कोई उसकी ...
जल-जल चलता बसता गाँव, बस्ती में ना वाका ठाँव, खुसरो ने दिया वाका नाँव, बूझो अरथ नहि छोड़ो गाँव ।
मुझको आवे यही परेख, पैर न गर्दन मोढा एक।
अन्दर है और बाहर बहे, जो देखे सो मोरी कहे।
सावन भादों बहुत चलत है माघ पूस में थोरी, अमीर खुसरो यूँ कहें तू बुझ पहेली मोरी।
इधर को आवे उधर को जावे, हर हर फेर काट वह खावे, ठहर रहे जिस दम वह नारी, खुसरों कहे बरे को आरी।
नर नारी कहलाती है, और बिन वर्षा जल जाती है, पुरख से आवे पुरख में जाई , न दी किसी न...
अमीर खुसरो ने बिन-बूझ पहेलियाँ (संकेतों के आधार पर उत्तर ढूँढना)की रचना की ।'बिन-बूझ' पहेल...
श्याम बरन कि है नारी, माथे ऊपर लगे है प्यारी, जो मानस इस अर्थ को खोले, कुत्ते के वह बोली बोले।
एक गुनी ने ये गुन कीना, हरियल पिंजरे में दे दीना, देखो जादूगर का कमाल, डारे हरा निकाले लाल।
आदि कटे से सबको पारे, मध्य कटे से सबको मारे, अन्त कटे से सबको मीठा, खुसरो वाको ऑंखो दीठा।