रंग बिरंगा बदन है इसका कुदरत का वरदान मिला इत...
रंग बिरंगा बदन है इसका कुदरत का वरदान मिला इतनी सुंदरता पाकर भी दो अक्षर का नाम मिला ये वन में करता ...
141 पहेलियां मिलीं
चालाकी से सोचने वाली ट्रिकी पहेलियां
रंग बिरंगा बदन है इसका कुदरत का वरदान मिला इतनी सुंदरता पाकर भी दो अक्षर का नाम मिला ये वन में करता ...
राजा महाराजाओं के ये कभी बहुत ही आया काम संदेशा इसने पहुंचाया सुबह चाहा या थी शाम बतलाओ अब इसका नाम
आगे प है मध्य में भी प अंत में इसके ह है कीट पतंग नहीं ये भैया न बिल्ली चूहा है वन में पेड़ों पर रहता...
नोच-नोच कर खाता मांस जीव है दुनिया का ये खास दो अक्षर का छोटा नाम लेकिन इसका मोटा काम उड़ता रहता सुबह...
गोरा नारा बड़ा ही प्यारा बड़ा नरम और कोमल हूं खट्टा-मीठा जैसा चाहो मिल जाता मैं हर पल हूं दूध में दिखत...
दो अक्षर से मेरा नाता एक इशारे पर खुल जाता जब चाहो तब बंद हो जाता सावन, भादो याद में आता मर्जी ना हो...
कई कपड़ों के पार हुई एक नहीं सौ बार हुई फिर भी ना बेकार हुई और तेज मेरी धार हुई पूंछ है मेरी तो पूछ ह...
रूप है काला खून बैगनी ऐसी मेरी फितरत है मेरी चमड़ी लोगों को भाए ऐसी मेरी किस्मत है बारिश में मैं आती ...
खट्टा मगर रसीला हूं ऊपर से हरा या पीला हूं मेरी खोपड़ी काट के पकड़ो हाथों में मुझको तुम जकड़ो लगा दूं र...
मेरे नाम के दो हैं मतलब दोनों के हैं अर्थ निराले एक अर्थ में सब्जी हूं मैं एक अर्थ में पालने वाले सो...
लगे मात्रा तो हूं खाक हटे मात्रा तो पक्षी सुरीला काला मेरा रूप कुरूप करे क्या काला मुझको धूप नाम बता...
नहीं सुदर्शन चक्र मगर मैं चकरी जैसा चलता सिर के ऊपर उलटा लटका फर्श पे नहीं उतरता बर्फ नहीं पर हवा है...
मेहमानों का स्वागत मुझसे करती मैं खातिरदारी ना मीठी ना खट्टी हूं मैं नमकीन ना मैं तरकारी तरल रूप है ...
लाल रंग है घर मेरा अंग है सबमें ही मैं पया जाऊं लेकिन तब हो बड़ी मुसीबत जब मैं कहीं बह जाऊं हिंदू-मुस...
तीन अक्षर का मेरा नाम बहना टपकना मेरा काम मेहनत जब ज्यादा हो जाए या फिर होए थकान तब मैं दिखलाई देता ...
दो मुंह वाली बड़ी निराली ऊ पर से चौड़ी अंदर से खाली पीटो मुझे तो निकले हैं बोल घर में खुशी हो या गाना ...
सारे तन में छेद कई हैं इन छेदों का भेद यही है ये ना हों तो मैं बेकार इनसे ही है मेरा संसार तब ही मैं...
नरम कुरकुरा नाजुक काया बिखर जाऊं गर जोर से दबाया पर जब खाने की हो तैयारी मुझ बिन अधूरी रोटी तरकारी आ...
नाम का बड़ा हूं मगर में छोटा पर इस बात पे नहीं मैं रोता मेरे आगे गले ना किसी की दाल मेरे आगे दाल हो ज...
कितना ज्ञान भरा है इसमें, भाव तो ज्ञानी ही जाने| पर अज्ञानी जीव कभी भी, असली रूप ना पहचाने ||