लोहा खींचू ऐसी ताकत है, पर रबड़ मुझे हराता है...
लोहा खींचू ऐसी ताकत है, पर रबड़ मुझे हराता है, खोई सूई मैं पा लेता हूँ, मेरा खेल निराला है।
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लोहा खींचू ऐसी ताकत है, पर रबड़ मुझे हराता है, खोई सूई मैं पा लेता हूँ, मेरा खेल निराला है।
ऊपर से नीचे बहता हूँ, हर बर्तन को अपनाता हूँ, देखो मुझको गिरा न देना वरना कठिन हो जाएगा भरना।
मुझमें भार सदा ही रहता, जगह घेरना मुझको आता, हर वस्तु से गहरा रिश्ता, हर जगह मैं पाया जाता
हरा हूँ पर पता नहीं नकलची हूँ पर बंदर नहीं बूझो तो मेरा नाम सही !!
बूझो भइया एक पहेली जब काटो तो नई नवेली !!
एक नारी के है दो बालक, दोनो एक ही रंग, पहला चले दूसरा सोवे,फिर भी दोनों संग ॥
गोल हुँ पर गेंद नहीं कांच हुँ पर दर्पण नहीं रोशनी देता हुँ पर सूरज नहीं , मैं हुँ एक अनमोल अनोखा बोल...
तीन अक्षर का मेरा नाम प्रथम कटे तो शस्त्र बनु । अंत कटे तो ज्वाला , मध्य कटे तो बनु मैं आन, बोलो क्य...
तीन अक्षर का हैं उसका नाम ,आता हैं जो खाने के काम । अंत कटे हल बन जाये ,मध्य कटे तो हवा बन जाये ।
हरा आटा लाल पराँठा सखियों ने मिलकर बांटा बताओ क्या ?
साथ-साथ मैं जाती हूँ हाथ नहीं मैं आती हूँ ?
मेरा भाई बड़ा शैतान बैठे नाक पर पकड़े कान
आगे-आगे बहना आई पीछे-पीछे भइया दाँत निकाले बाबा आए बुरका ओढ़े मइया बताओ क्या ?
सिर पर पत्थर पेट में अंगुलि बताओ क्या ?
हरी थी मन भरी थी नो लाख मोतियों से जड़ी थी राजा जी के खेत में दुप्पटा ओढ़े खड़ी थी.
छोटा सा सिपाही उसकी खिंच के निकर उतारी
दो किसान लड़तें जाए उनकी खेती बढ़ती जाए.
ऐसी कौन सी चीज़ है जिसे आगे से तो बनाया हैं भगवान ने और पीछे से इंसान ने–
एक थाल मोतियों से भरा सबके सर पर उलटा धरा चारों ओर फिरे वो थाल मोती उससे एक ना गिरे
हरी डंडी लाल कमान तोबा तोबा करे इन्सान बताओ क्या ?