सीधी होकर, नीर पिलाती उलटी होकर दीन कहलाती !!
सीधी होकर, नीर पिलाती उलटी होकर दीन कहलाती !!
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सीधी होकर, नीर पिलाती उलटी होकर दीन कहलाती !!
हरी टोपी वाला है, लाल वर्दी वाला। खाने के काम में आऊं, नाम कहो लाला॥
लिखता हूँ पर पैन नहीं, चलता हूँ पर गाड़ी नहीं, टिक -टिक करता हूँ, पर घड़ी नहीं ॥
हम कहलाते है बावन चोर, हमसे बढ़कर कोई नहीं और। चाहो तो हम दिल बहलाए, या फिर कंगाल-निर्धन बनाएं॥
हरे रंग की टोपी मेरी हरे रंग का है दुशाला जब पक जाती हूँ मैं तो हरे रंग की टोपी लाल रंग का होता दुशा...
हरे रंग की टोपी मेरी हरे रंग का है दुशाला जब पक जाती हूँ मैं तो हरे रंग की टोपी लाल रंग का होता दुशा...
रंग है मेरा काला उजाले में दिखाई देती हूँ अँधेरे में छिप जाती हूँ
ना मुझे इंजन की जरूरत ना मुझे पेट्रोल की जरुरत जल्दी जल्दी पैर चलाओ मंजिल अपनी पहुँच जाओ
रोज सुबह को आता हूँ रोज शाम को जाता हूँ मेरे आने से होता उजियारा जाने से होता अँधियारा
गोल गोल आखों वाला लंबे लंबे कानों वाला गाजर खूब खाने वाला इसका नाम बताओ लाला ?
कान मरोड़े पानी दूंगा, मैं कोई पैसा नही लूंगा। बताओ कौन हूँ मैं?
ऊपर से नीचे बहता हूँ; हर बर्तन को अपनाता हूँ; देखो मुझको गिरा न देना; वरना कठिन हो जाएगा भरना।
गर्मी में तुम मुझको खाते; मुझको पीना हरदम चाहते; मुझसे प्यार बहुत करते हो; पर भाप बनूँ तो डरते भी...
तुम न बुलाओ मैं आ जाऊँगी; न भाड़ा न किराया दूँगी; घर के हर कमरे में रहूँगी; पकड़ न मुझको तुम पाओग...
पढ़ने में, लिखने में, दोनों में ही मैं आता काम; कलम नहीं कागज़ नहीं, बताओ क्या है मेरा नाम?
सीधी होकर, नीर पिलाती; उलटी होकर दीन कहलाती। बताओ क्या?
यह फूल है काले रंग का, सिर पर हमेशा सुहाए; तेज धूप में खिल-खिल जाता, पर छाया में मुरझाए। बताओ क्या...
एक राजा की अनोखी रानी, दुम के सहारे पीती पानी। बताओ क्या?
खरीदने पर काला, जलाने पर लाल और फेंकने पर सफ़ेद। बताओ क्या?
तीन पैरों वाली तितली नहा कर निकली। बताओ क्या?