धीरे से चलकर यह है आती

धीरे से चलकर यह है आती खिल-खिलाकर हंसी बनाती न है नाक पर और न कान होंठो पर है उसकी पहचान

"dheere se chlkr yh hai aatee khil-khilakr hnsee bnatee n hai nak pr aur n kan hontho pr hai uskee phchan"

उत्तर:

मुस्कान

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