उसको सूरज कभी ना भाये
उसको सूरज कभी ना भाये अन्धियारे मे निकसत पाये ज्यो ज्यो साप ताल को खाये सूखे ताल साप मर जाय
200 पहेलियां मिलीं
बच्चों के लिए आसान और मजेदार पहेलियां
उसको सूरज कभी ना भाये अन्धियारे मे निकसत पाये ज्यो ज्यो साप ताल को खाये सूखे ताल साप मर जाय
सत्य धर्म का बोझ सहता जितना होता उतना कहता हाथ के आजू बाजू फेले पाव मे रहते दो थेल
एक थाल मोतियो से भरा सब के सिर पर औन्धा धरा चारो ओर वह थाली फिरे मोती फिर भी एक ना गिरे
सिर पर सिकुडी, आगे छितरी हर घर मे हे सजा शान से चलती धूल उडाती करती काम यह ताजा
एक इन्सान का अचरज भेद हाड हाड मे वाके छेद मोहि अचम्भा आवे ऐसे जीव बसे हे वामे केसे
मुह काला पर काम बडा कद छोटा पर नाम बडा मेरे वश मे दुनिया सारी रहू जेब मे सस्ती प्यारी
रोन्दे जिसको उसको काटे कभी बनता हत्थयारा इसे जेल फासी न होती रखे बिना नही चारा
मुर्गी एक निराली चलत-चलत थक जाये लाऑ चाकू काटो गर्दन फिर वो चलन पाय
जो आगे आये वह काट गिराऊ बिना काटे मे चेन न पाऊ फिर भी तुम मुझको चमकाते सुबह शाम हरदम नहलात
चार खूट का नगर बसाया चार कुए बिन पानी चोर अठारह नगर मै बेठे लेके साथ मै रानी
बिन बताये रात को आते हैं बिन चोरी किये गायब हो जाते हैं बताओ तो क्या हैं ?
मुर्गी अंडा देती है और गाय दूध देती है। पर ऐसा कौन है जो अंडा और दूध दोनों ही देता है?
मैं हरी मेरे बच्चे काले मुझे छोड़ मेरे बच्चे खाले
चूल्हा नाराज क्यों ? और बुड्डा उदास क्यों ?
गोल गोल घूमता जाऊं ठंडक देना मेरा काम गर्मी में आता हूँ काम
पैसा खूब लुटाती हूँ घर घर पूजी जाती हूँ मेरे बिना बने ना काम बच्चों बताओ इस देवी का नाम ?
बूझो भैया एक पहेली जब भी काटो तो निकले नई नवेली
काली काली माँ लाल लाल बच्चे जिधर जाए माँ, उधर जाए बच्चे
मैं मरुँ मैं कटूं तुम क्यों रोये
अगर नाक पे मैं चढ़ जाऊं तो कान पकड़ कर खूब पढ़ाऊँ