खट्टी-खट्टी हो अदा मेरी । चटनी बनती सदा मेरी।...
खट्टी-खट्टी हो अदा मेरी । चटनी बनती सदा मेरी।। तीन अक्षर में नाम आये। बीज दवा के काम आये।।
200 पहेलियां मिलीं
बच्चों के लिए आसान और मजेदार पहेलियां
खट्टी-खट्टी हो अदा मेरी । चटनी बनती सदा मेरी।। तीन अक्षर में नाम आये। बीज दवा के काम आये।।
चार अक्षर का नाम बतलाये। पर्याय एक गौत्र कहलाये।। औषधी के है काम आए। भैया अब तो दो बतलाए।।
दूर देशों से यहां चलकर आया। यहां आकर अपना वर्चस्व जमाया।। इसका है दो अक्षर का नाम बताया। अफारा दूर ...
हिमालय में है मेरा वास। बनता हूं मैं तेरा निवास ।। फर्नीचर के भी काम आता। जो नष्ट करे वो पछताता।।
तीन अक्षर का नाम बतलाता। आदी कटे दलदल कहलाता।। मध्य कटे बिक्री हूं करवाता। अंत कटे दलदल कहलाता।।
तीन अक्षर का मेरा नाम। औषध में आता हूं काम।। यदि का पर्याय है कहलाता। दूजा नाम आयरन बतलाता।।
चार अक्षर का है नाम मेरा। मैं दवाइयों का करूं काम।। फल से वृक्ष नाम कहलाता । हर किसी के हूं काम आता...
मेरा दो अक्षर में नाम आता। पहाड़ी वृक्षों में गिना जाता।। मैं कंटीला वृक्ष कहलाता। पहाड़ो की शोभा ब...
मेरे नाम से रंग कहा जाता। साढ़े तीन अक्षर का नाम आता।। मेरा फल खाया है जाता। शरबत मे भी काम आता
साढ़े तीन अक्षर का नाम आता। कल्पना से मेरा गहरा नाता।। वृक्षों में वृक्ष कहा जाता। श्री कृष्ण, अर्ज...
साढ़े तीन अक्षर में नाम आता। रोज को हूं मैं मिटता जाता।। शिवजी का से प्रिय कहलाता। फल का मणिया बनाय...
एक बात को तू कबूल। मेरे प्रसिद्ध फू ल ।। दाई का पर्याय कहलाता। दो अक्षर का नाम बतलाता।।
पांच अक्षर का नाम बतलाता। पहाड़ी पेड़ यह कहलाता।। इससे बायोडीजल निकलता। डीजल से यंत्र है चलता।।
दो अक्षर का मेरा नाम क हलावे। कच्ची कली मशाला के काम आये।। दक्षिण भारत मे इसका निवास। औषधीय वृक्ष ह...
अपनी देह पर सूत लपटे, उस बंदे को नाचत देखा | पाँव अजबूा है लोहे का , बदन पर रहती पाँच - छः रेखा |
वह पाले ना भैस या गाय, फिर भी दुध मलाई खाए | घर बैठे ही करे शिकार , गया शेर भी उससे हार |
अक्षर तीन काया दोय सिर पर चढ जाना होय जिधर निहारू जग उजियारा ओढू चादर तो अन्धियारा
तन गोरा मुह चान्द सा कोई न कहे अधूरी तोला माशा तोड लो फिर भी पूरी की पूरी
छोटे बडे सभी को भाये बुझ सके तो बूझ गोल मटो रन्ग हे पीला पेट मे दाढी मुछ
एक नगरी मे चोसठ घर दो पास बेठे भर चाव उस नगरी का यही स्वभाव कटे-मरे, लगे न घाव