लम्बा चोडा रुप निराला
लम्बा चोडा रुप निराला उजली देह किनारा काला जो धोबिन करती हे काम उसका भी वही हे नाम
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लम्बा चोडा रुप निराला उजली देह किनारा काला जो धोबिन करती हे काम उसका भी वही हे नाम
उसको सूरज कभी ना भाये अन्धियारे मे निकसत पाये ज्यो ज्यो साप ताल को खाये सूखे ताल साप मर जाय
उसका पी जब छाती लाय अच्छा भला काना हो जाय डरे शेर भी- सो चिल्लाय जिस पर थूके वो मर जाय
सिर पर सिकुडी, आगे छितरी हर घर मे हे सजा शान से चलती धूल उडाती करती काम यह ताजा
मुह काला पर काम बडा कद छोटा पर नाम बडा मेरे वश मे दुनिया सारी रहू जेब मे सस्ती प्यारी
रौशनी मुझे बनाती है पर अँधेरा मुझे मारता है। मैं क्या हूँ?
अगर एक मुर्गा सुबह अंडा देता है तो उसके मालिक को वो कब मिलेगा?
एक लड़का और एक लड़की मोटर साइकिल पर जा रहे थे। एक पुलिस वाले ने उन्हें रोका और उनका रिश्ता पूछा। लड़का...
दो बेटे और दो बाप सर्कस देखने गए। उनके पास केवल 3 टिकट थी, फिर भी सबने सर्कस देखी। कैसे?
वो क्या है जो सिर्फ कहने भर से टूट जाती है?
अचरज बंगला एक बनाया, बाँस नबल्ला बंधन धने। ऊपर नींव तरे घर छाया, कहे खुसरो घर कैसे बने।।
माटी रौदूँ चक धर्रूँ, फेर्रूँ बारम्बर। चातुर हो तो जान ले मेरी जातगँवार।।
गोरी सुन्दर पातली, केहर काले रंग। ग्यारह देवर छोड़ कर चली जेठ केसंग।।
ऊपर से एक रंग हो और भीतर चित्तीदार। सो प्यारी बातें करे फिकर अनोखीनार।।
बाल नुचे कपड़े फटे मोती लिए उतार। यह बिपदा कैसी बनी जो नंगी करदई नार।।
एक नार कुँए में रहे, वाका नीर खेत में बहे। जो कोई वाके नीर को चाखे, फिर जीवन की आस न राखे।।
एक जानवर रंग रंगीला, बिना मारे वह रोवे। उस के सिर पर तीन तिलाके, बिन बताए सोवे।।
चाम मांस वाके नहीं नेक, हाड़ मास में वाके छेद। मोहि अचंभो आवत ऐसे, वामे जीव बसत है कैसे।।
स्याम बरन की है एक नारी, माथे ऊपर लागै प्यारी। जो मानुस इस अरथ को खोले, कुत्ते की वह बोली बोले।।
एक थाल मोतियों से भरा, सबके सर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।