सुंदर-सुंदर ख्वाब दिखाती;
सुंदर-सुंदर ख्वाब दिखाती; पास सभी के रात में आती; थके मान्दे को दे आराम; जल्द बताओ उसका नाम।
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सर्वश्रेष्ठ हिंदी पहेलियों का संग्रह उत्तर सहित
सुंदर-सुंदर ख्वाब दिखाती; पास सभी के रात में आती; थके मान्दे को दे आराम; जल्द बताओ उसका नाम।
रात गली में खड़ा-खड़ा , डंडा लेकर बड़ा-बड़ा। रहो जागते होशियार , कहता है वो बार-बार।
बेशक न हो हाथ मे हाथ, पर जीता है वो आप के साथ, बताओ क्या?
पैर नहीं पर चलती हूँ कभी न राह बदलतीे हूँ नाप-नाप कर चलती हूँ तो भी न घर से टलती हूँ।
आते-जाते दुःख है देते , बीच में देते आराम , कड़ी-दृष्टि रखना इन पर सदा सुबह और शाम।
चार खण्डों को नगर बना , चार कुए बिन पानी चोर अठारह उसमे बैठे , लिए एक रानी आया एक दरोगा सबको पी...
अंदर चिलमन , बाहर चिलमन , बीच कलेजा धड़के , नाकु सिन्हा यों कहें , दो-दो अंगुल सरके।
लंबा तन और बदन है गोल; मीठे रहते मेरे बोल; तन पे मेरे होते छेद; भाषा का मैं न करूँ भेद।
काली-काली एक चुनरिया, जगमग-जगमग मोती; आ सजती धरती के ऊपर, जब सारी दुनिया सोती। बताओ क्या?
दो सुंदर लड़के, दोनों एक रंग के; एक बिछड़ जाये तो दूसरा काम न आये।
जितनी ज्यादा सेवा करता; उतना घटता जाता हूँ। सभी रंग का नीला-पीला; पानी के संग भाता हूँ। बताओ क्य...
आगे ''त' है पीछे 'त'' है; इसको सब कुछ बड़ा पता है; नकल उतारे सुनकर व...
भूरा बदन, रेखाएं तीन; दाना खाती हाथ से बीन। बताओ क्या?
दर पे तेरे बैठा हूँ मैं, करने को रखवाली; बोलो, भैया साथ ले गए, क्यों मेरी घरवाली। बताओ क्या?
हरा चोर लाल मकान; उसमे बैठा काला शैतान; गर्मी में वह है दिखता; सर्दी में गायब हो जाता! बताओ क्या...
चलने को तो चलता हूँ , गर्मी में सुख पहुंचाता हूँ। पैर भी हैं मेरे तीन , मगर आगे बढ़ नहीं पाता हूँ
एक मुर्गा चश्मदीदम चलते चलते थक गया; लाये चाक़ू काटी गर्दन फिर से चलने लग गया। बताओ क्या?
एक पहेली मैं बुझाऊँ, सिर को काट नमक छिड़काउ।
एक फूल है काले रंग का , सिर पर सदा सुहाए। तेज धूप में खिल-खिल जाता , पर छाया में मुरझाये।
जो तुझमे है वह उसमे नहीं , जो झंडे में है वह डंडे में नहीं।