ना सडे ना जन्ग लगे
ना सडे ना जन्ग लगे घिसे ना कबहू जोन बाटे तो बढत रहत कहो वो आयुध कोन
200 पहेलियां मिलीं
हँसाने वाली मजेदार पहेलियां
ना सडे ना जन्ग लगे घिसे ना कबहू जोन बाटे तो बढत रहत कहो वो आयुध कोन
राजा ने एक भवन बनवाया ताल नही पर नाम कहाया जो कोई उस भवन मै जाए पडा रहे ओर रोग भगाए
नदी बहुत हे पर नही पानी दिखे नगर पर दिखे न प्रानी कालिख से ये बनी हे काया कागज पर स्थान हे पाया
मेहरबान रहू मे जिस पर पाता हे वो सदा शिखर मेने जिससे आख चुराई उसने हरदम ठोकर खाई
एक आहार घर घर मै डटा बदन है पूरा उसका फटा धरती जन्मे काफी ज्यादा रुप-रन्ग है बिल्कुल सादा
लम्बा चोडा पर ना पाश आदि कटे कहलाता काश तीन अक्षर का नाम है मेरा अन्तहीन है मेरा घेरा
देश विदेश फिरे वो नारी जिन पाई उन चीरी फारी ना हड़ी ना खून ना खाल गून्गी हे पर देव हाल
एक नारी का मेला रन्ग लगे रहे वह पी के सन्ग रोशनी मे सन्ग विराजे अन्धेरे मे छोड के भागे
नाव के भीतर नदी नदी के बीतर नाव बिन खेवे चलती सदा रात मे पाती छाव
गहना तेरे आठ गाठ का गाठ गले मे रस जो इसको ना बुझे वो गाली पाए दस
अपनी देह पर सूत लपटे, उस बंदे को नाचत देखा | पाँव अजबूा है लोहे का , बदन पर रहती पाँच - छः रेखा |
चार अक्षर का है मेरा नाम। गहरी छाया, फल देनरा काम।। पत्तों से कीड़े हैं पलते। कीड़ों से हम कपड़ा बु...
ख्याति की तुम अंग्रेजी बनाओ। मेरा नाम तुम स्वत: ही पाओ।। प्लाईवुड लकड़ी से बनती। वृक्ष की हरी लकड़ी...
हिमालय से चलकर आता। तीन अक्षर में नाम आता।। दूध में मैं जुड़ता जाता। जब मैं बुद्धी को बढ़ाता।।
चार अक्षर का पेड़ कहलाता। फल गरीबों का सेब कहलाता।। साल में दो बार फल लगता। तोता काटने है भगता।।
मैं गहरी छाया का राजा। बेकार होती लकड़ी ताजा। कुल तीन अक्षर का नाम आता। प्रथम कटे बराबर कहलाता।
तीन अक्षर वृक्ष कहलाता। मध्य कटे तो सीर बन जाता।। अंत कटे तो शीश बन जावे। आदि कटे तो सर कहलावे।।
राजपुष्प इसका फूल कहलाता। सुखे इलाके में यह पाया जाता।। तीन अक्षर का यह बताये नाम। लकड़ी इमारत में ...
पत्ते शिव पूजन में आये काम। केवल दो अक्षर में आये नाम। नाम अर्थ से बना लता। बने सर्वथ फल से दिया बता...
इसका चार अक्षर का नाम है। फूलों का कविताओं में नाम है। फूलों की उपमा होवत भारी। कच्ची कलियों की शोभ...