अंत कटे तो स्वर्ण कहाऊँ, प्रथम कटे तो में गिर...
अंत कटे तो स्वर्ण कहाऊँ, प्रथम कटे तो में गिर जाऊ| नहीं कटे तो तीर्थ कहाऊँ,सभी साधर्मी के मन को भाऊ ...
200 पहेलियां मिलीं
हँसाने वाली मजेदार पहेलियां
अंत कटे तो स्वर्ण कहाऊँ, प्रथम कटे तो में गिर जाऊ| नहीं कटे तो तीर्थ कहाऊँ,सभी साधर्मी के मन को भाऊ ...
अग्नि परीक्षा दी सीता ने, छोड़ दिया राम ने उसको| जिस माताजी से दीक्षा धारी ,उस माताजी का नाम बताओ ||
राग मोह का नाम नहीं है, भूख प्यास का कम नहीं है| इस ही तन से मोक्ष जु पावे ,महिमा उनकी सब जन गावे ||
पहेली 1 एक परख है सुंदर मूरत, जो देखे वो उसी की सूरत। फिक्र पहेली पायी ना, बोझन लागा आयी ना।।
बाला था जब सबको भाया, बड़ा हुआ कुछ काम न आया। खुसरो कह दिया उसका नाँव, अर्थ कहो नहीं छाड़ो गाँव।।
सदा ही मैं चलती रहती; फिर भी कभी नहीं मैं थकती; जिसने मुझसे किया मुकाबला; उसका ही कर दिया तबादला; बत...
लाल संत्री रंग है मेरा; आती हूँ मैं खाने के काम; सिर पर रहती हरियल चोटी; जल्दी बताओ मेरा नाम
काँटों से निकले; फूलों में उलझे; नाम बतलाओ; तो समस्या सुलझे।
प्रथम कटे हाथी बन जाऊं; मध्य कटे तो काम कहाऊं; अंत कटे तो काग कहाऊं; पढ़े-लिखे के काम में आऊं
सुंदर-सुंदर ख्वाब दिखाती; पास सभी के रात में आती; थके मान्दे को दे आराम; जल्द बताओ उसका नाम।
लंबा तन और बदन है गोल; मीठे रहते मेरे बोल; तन पे मेरे होते छेद; भाषा का मैं न करूँ भेद।
कर बोले कर ही सुने; श्रवण सुने नहीं थाह; कहें पहेली बीरबल; बूझो अकबर शाह
मेरा भाई बड़ा शैतान बैठे नाक पर पकड़े कान
एक घर में राजा सोएँ दूसरे में पाँव पसारें
चार पाँव पर चल न पाए चलते को भी वह बैठाए
दिन में लटकी रात में अटकी
सिर पर पत्थर पेट में अंगुलि
सदा करूं चौकीदारी मेरे दम पे दुनियादारी
एक लड़का जनम का हीना जिन देखा तिन थू-थू कीना
गोल मोल और छोटा मोटा हर दम वह जमीन पर लोटा खुसरो कहे यह नहीं झूठा जो न बूझे अक्ल का खोटा