कागज़ की सी गोल है काया , भरे पेट में पानी |
कागज़ की सी गोल है काया , भरे पेट में पानी | खाए लगे चटपटे नीके , अर्थ करे सों ज्ञानी ||
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हर पहेली के साथ विस्तृत उत्तर और व्याख्या
कागज़ की सी गोल है काया , भरे पेट में पानी | खाए लगे चटपटे नीके , अर्थ करे सों ज्ञानी ||
तप करता तपस्वी नहीं ,हलधर का बलराम | माटी से चाँदी करे , ज्ञानी खोलो नाम ||
सिर उसका लगता था मटका , मटके को घर लाकर पटका | कुछ को खाया कुछ को फैंका मटके का पानी भी गटका ||
हरा घेरा पीला मकान | उसमें रहते काले इंसान ||
मुझमे है ताकत इतनी काट देती हूँ पत्थर को धीरे धीरे कर लेते ही मुझसे काबू मे घोड़े हाथी और बहुतों को ...
कश्मीर निवासी फल मजेदार | खाए मुझे वह नहीं पड़े बीमार ||
आगे-आगे बहिना आई, पीछे-पीछे भइया। दाँत निकाले बाबा आए, बुरका ओढ़े मइया।।
चार अंगुल का पेड़, सवा मन का फ्ता। फल लागे अलग अलग, पक जाए इकट्ठा।।
अचरज बंगला एक बनाया, बाँस न बल्ला बंधन धने। ऊपर नींव तरे घर छाया, कहे खुसरो घर कैसे बने।।
माटी रौदूँ चक धर्रूँ, फेर्रूँ बारम्बर। चातुर हो तो जान ले मेरी जात गँवार।।
गोरी सुन्दर पातली, केहर काले रंग। ग्यारह देवर छोड़ कर चली जेठ के संग।।
ऊपर से एक रंग हो और भीतर चित्तीदार। सो प्यारी बातें करे फिकर अनोखी नार।।
लिया जाता है मेरो नाम युगों युगों और सदियों से मेरे बाद आए थे कान्हा हो जाती है हरयाली मेरे आने से ...
एक बार भोजन कर लो ,तुमको खूब खिलाऊं | अगर दुबारा मुझको चाहो , नहीं काम मैं आऊं
खाली पेट बड़ी मस्तानी | लोग कहे पानी की रानी ||
रहता हु घर मे, होटल और दफ्तर मे अक्षर हैं तीन मेरे पास पहला अक्षर कट जाऊँ तो नही लगाओगे मुझसे कोई आ...
मुझमें भार सदा ही रहता, जगह घेरना मुझको आता, हर वस्तु से गहरा रिश्ता, हर जगह मैं पाया जाता
Aisi Kon Si Cheez Hei Jisey Aagey Sey Toh Banayaa Hein Bhagwan Ney Aur Pichey Sey Insaan Ney
Chhota Sa Sipahi Ushki Khinch Ke Nikar Uttari.
Padhney Mein Likhney Mein Dono Mein Hi Main Aata Kaam Pen Nhi Kagaz Nhi Btaao Kya Hei Mera Naam.