परत परत पर जमा हुआ है,
परत परत पर जमा हुआ है, इसे ज्ञान ही जान। बस्ता खोलोगे तो इसको, जाओगे तुम पहचान।
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हर पहेली के साथ विस्तृत उत्तर और व्याख्या
परत परत पर जमा हुआ है, इसे ज्ञान ही जान। बस्ता खोलोगे तो इसको, जाओगे तुम पहचान।
काला हण्डा, उजला भात, ले लो भाई हाथों -हाथ।
हाथी, घोड़ा ऊँट नहीं, खाए न दाना, घास। सदा ही धरती पर चले, होए न कभी उदास।
मैं हरी, मेरे बच्चे काले, मुझको छोड़, मेरे बच्चे खाले।
चार हैं रानियाँ और एक हैं राजा, हर कए काम में उनका अपना साझा।
तीन अक्षरों का मेरा नाम, आदि कटे तो चार। कैसे हो तुम मैं जानूँ, बोलो तुम सोच-विचार।
एक फूल है काले रंग का, सिर पर सदा सुहाए। तेज धूप में खिल-खिल जाता, पर छाया में मुरझाये।
हाथ-पैर सब जुदा-जुदा, ऐसी सूरत दे खुदा। जब वह मूरत बन ठन आवे, हाथ धरे तो राग सुनाए।
अन्त कटे कौआ बन जाए, प्रथम कटे दूरी का माप। मध्य कटे तो कार्य बने, तीन अक्षर का उसका नाम।
एक छोटा-सा बंदर, जो उछले पानी के अंदर।
थल में पकड़े पैर तुम्हारे, जल में पकड़े हाथ। मुर्दा होकर भी रहता है, जिंदो के ही साथ।
बच्चे भी कहते है मामा, बूढ़े भी कहते है मामा। दीदी भी कहती है मामा, बोलो कोनसे मामा।
तीन पैर की तितली, नहा-धोकर निकली
न काशी, न काबाधाम, बिन जिसके हो चक्का जाम। पानी जैसी चीज है वह झट बताओ उसका नाम।
आवाज है, इंसान नहीं, जवान है निशान नहीं।
खुशबु है गुलाब नहीं, रंगीन है लेकिन शराब नहीं। सुगंध है, कोई प्रेम पत्र नहीं, ये जहर है लेक...
शुरू कटे तो नमक बने, मध्य कटे तो कान। अंत कटे तो काना बने, जो न जाने उसका बाप शैतान।
हरी डिब्बी, पीला मकान, उसमें बैठे कल्लू राम।
खड़ी करो तो गिर पड़े, दौड़ी मीलों जाए। नाम बता दो इसका, यह तम्हे हमें बिठाए।
बिल्ली की पूँछ हाथ में, बिल्ली रहे इलाहाबाद में।