दो अक्षर से मेरा नाता
दो अक्षर से मेरा नाता एक इशारे पर खुल जाता जब चाहो तब बंद हो जाता सावन, भादो याद में आता मर्जी ना हो तो भी मैं नहाता लेकिन मुझे बुखार न आता
उत्तर:
उत्तर:- छाता
दो अक्षर से मेरा नाता एक इशारे पर खुल जाता जब चाहो तब बंद हो जाता सावन, भादो याद में आता मर्जी ना हो तो भी मैं नहाता लेकिन मुझे बुखार न आता
उत्तर:- छाता
तीन अक्षर का मेरा नाम। औषध में आता हूं काम।। यदि का पर्याय है कहलाता। दूजा नाम आयरन बतलाता।।
र मे नित्य विरक्त रहे जो, सिद्धप्रभु का ध्यान करे जो | एक दिवस खुद मुनिपद पाया, अंतर मुहूर्त मे केवल...
सत्य अहिंसा के अनुरागी, वीतरागता जिनकी नामी| तीस वर्ष में मुनि पद पाया, देवों तक ने उनको गाया ||
नाम का बड़ा हूं मगर में छोटा पर इस बात पे नहीं मैं रोता मेरे आगे गले ना किसी की दाल मेरे आगे दाल हो ज...
रंग बिरंगा बदन है इसका कुदरत का वरदान मिला इतनी सुंदरता पाकर भी दो अक्षर का नाम मिला ये वन में क...
कई कपड़ों के पार हुई एक नहीं सौ बार हुई फिर भी ना बेकार हुई और तेज मेरी धार हुई पूंछ है मेरी तो प...
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