कई कपड़ों के पार हुई एक नहीं सौ बार हुई फिर भी...
कई कपड़ों के पार हुई एक नहीं सौ बार हुई फिर भी ना बेकार हुई और तेज मेरी धार हुई पूंछ है मेरी तो पूछ है मेरी फटा जोड़ दूं करूं न देरी बतलाओ पहचान क्या मेरी
उत्तर:
सुई
कई कपड़ों के पार हुई एक नहीं सौ बार हुई फिर भी ना बेकार हुई और तेज मेरी धार हुई पूंछ है मेरी तो पूछ है मेरी फटा जोड़ दूं करूं न देरी बतलाओ पहचान क्या मेरी
सुई
स्वर्ण जैसा है नाम मेरा । छांव, दाव से पडे काम तेरा।। चार अक्षर मेरे नाम में आते। दूजे में कृष्ण भी...
खेल यह भैया बड़ा अनोखा, दूजे की हद में दो उसे धोखा ताल ठोंका, सांस रोका, छू वापस दौड़ा, छोड़ा न मौका
मेहमानों का स्वागत मुझसे करती मैं खातिरदारी ना मीठी ना खट्टी हूं मैं नमकीन ना मैं तरकारी तरल रूप है ...
र मे नित्य विरक्त रहे जो, सिद्धप्रभु का ध्यान करे जो | एक दिवस खुद मुनिपद पाया, अंतर मुहूर्त मे केवल...
पांच अक्षर का नाम बतलाता। पहाड़ी पेड़ यह कहलाता।। इससे बायोडीजल निकलता। डीजल से यंत्र है चलता।।
लगे मात्रा तो हूं खाक हटे मात्रा तो पक्षी सुरीला काला मेरा रूप कुरूप करे क्या काला मुझको धूप नाम...
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