दो मुंह वाली बड़ी निराली
दो मुंह वाली बड़ी निराली ऊ पर से चौड़ी अंदर से खाली पीटो मुझे तो निकले हैं बोल घर में खुशी हो या गाना बजाना तो बढ़ जाता है मेरा रोल बड़े काम की है मेरी पोल
उत्तर:
उत्तर:- ढोलक
दो मुंह वाली बड़ी निराली ऊ पर से चौड़ी अंदर से खाली पीटो मुझे तो निकले हैं बोल घर में खुशी हो या गाना बजाना तो बढ़ जाता है मेरा रोल बड़े काम की है मेरी पोल
उत्तर:- ढोलक
नरम कुरकुरा नाजुक काया बिखर जाऊं गर जोर से दबाया पर जब खाने की हो तैयारी मुझ बिन अधूरी रोटी तरकार...
ऐसे गुरु के चरण पखारू, हृदय कमल पर उन्हें बिठा लू || सीमंधर को नमन किये थे, प्रभुवर से सक्च्चात मिले...
मेहमानों का स्वागत मुझसे करती मैं खातिरदारी ना मीठी ना खट्टी हूं मैं नमकीन ना मैं तरकारी तरल रूप...
स्वर्ण जैसा है नाम मेरा । छांव, दाव से पडे काम तेरा।। चार अक्षर मेरे नाम में आते। दूजे में कृष्ण भी...
रात हुई तो जनम लिया ,सुबह हूँ मोती जैसी | सूरज देखूं तो मर जाऊं ,मेरी किस्मत कैसी ||
साढ़े तीन अक्षर का नाम आता। कल्पना से मेरा गहरा नाता।। वृक्षों में वृक्ष कहा जाता। श्री कृष्ण, अर्ज...
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