पैर नहीं हैं
पैर नहीं हैं पर चलती रहती दोनों हाथों से अपना मुंह पोंछती रहती।
373 पहेलियां मिलीं
हर पहेली के साथ विस्तृत उत्तर और व्याख्या
पैर नहीं हैं पर चलती रहती दोनों हाथों से अपना मुंह पोंछती रहती।
खडा भी लोटा पडा पडा भी लोटा है बैठा और कहे हैं लोटा खुसरो कहे समझ का टोटा|
लाल रंग है घर मेरा अंग है सबमें ही मैं पया जाऊं लेकिन तब हो बड़ी मुसीबत जब मैं कहीं बह जाऊं हिंद...
पत्थर पर पत्थर पत्थर पर पैसा बिन पानी घर बनाए वह कारीगर कैसा?
आदि कटे से सबको पारे। मध्य कटे से सबको मारे। अन्त कटे से सबको मीठा। खुसरो वाको ऑंखो दीठा॥
दिन मे सोया रात मे रोया जितना रोया उतना खोया | मोमबत्ती |
हरी डंडी लाल कमान तोबा तोबा करे इन्सान बताओ क्या? लाल मिरच |
दो सुंदर लड़के दोनो एक रंग के इक बिचड़ जाए तो दूसरा काम न आए |
तीन अक्षर का मेरा नाम बहना टपकना मेरा काम मेहनत जब ज्यादा हो जाए या फिर होए थकान तब मैं दिखलाई द...
सरपट लगा हरा झंडा कितना मीठा और रसीला|
एक थाल मोती से भरा। सबके सिर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे। मोती उससे एक न गिरे॥
दो मुंह वाली बड़ी निराली ऊ पर से चौड़ी अंदर से खाली पीटो मुझे तो निकले हैं बोल घर में खुशी हो या गा...
सफेद तन हरी पूंछ न बुझे तो नानी से पूछ॥
एक नार ने अचरज किया। साँप मार पिंजरे में दिया। ज्यों-ज्यों साँप ताल को खाए। सूखै ताल साँप मरि जाए॥
सारे तन में छेद कई हैं इन छेदों का भेद यही है ये ना हों तो मैं बेकार इनसे ही है मेरा संसार तब ह...
प्यार करूँ तो घर चमका दूँ वार करूँ तो ले लूँ जान जंगल में मंगल कर दूँ कभी कर दूँ मैं शहर वीरान|
एक नारि के हैं दो बालक, दोनों एकहिं रंग। एक फिरे एक ठाढ रहे, फिर भी दोनों संग॥
नरम कुरकुरा नाजुक काया बिखर जाऊं गर जोर से दबाया पर जब खाने की हो तैयारी मुझ बिन अधूरी रोटी तरकार...
कपड़े उतरवाएँ पंखा चलवाए कहती ठंडा पीने को अभी-अभी तो नहा के आया फिर से कहती नहाने को|
श्याम बरन और दाँत अनेक, लचकत जैसे नारी दोनों हाथ से खुसरो खींचे और कहे तू आ री।