नाम का बड़ा हूं मगर में छोटा
नाम का बड़ा हूं मगर में छोटा पर इस बात पे नहीं मैं रोता मेरे आगे गले ना किसी की दाल मेरे आगे दाल ह...
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हर पहेली के साथ विस्तृत उत्तर और व्याख्या
नाम का बड़ा हूं मगर में छोटा पर इस बात पे नहीं मैं रोता मेरे आगे गले ना किसी की दाल मेरे आगे दाल ह...
जो जाकर न वापस आये जाता भी वह नजर न आये सारे जग में उसकी चर्चा वह तो अति बलवान कहाये|
हाड़ की देही उज् रंग, लिपटा रहे नारी के संग। चोरी की ना खून किया वाका सर क्यों काट लिया।
एक पक्षी ऐसा देखा ताल किनारे रहता था मुंह से आग उगलता था दुम से द्रव को पिता था |
एक टांग से खड़ा हुआ हूं एक जगह पर अड़ा हुआ हूं भरी छाता है मैंने ताना सब जीवों को देता हूं खाना ...
ऐसी कोंन सी चीज़ है जिसे जो इंसान खरीदता है उसे वो इंसान कभी नही पहनता, और जो इंसान उसे पहनता है व...
नारी से तू नर भई और श्याम बरन भई सोय। गली-गली कूकत फिरे कोइलो-कोइलो लोय।।
गोल-गोल चीजें बहुतेरी सर्वश्रेष्ट हूं , मानो मेरी इसको तुम समझो न गप मैं रुठुं तो दुनिया ठप|
वो कोनसा सा काम है जो 1 आदमी अपनी पूरी ज़िन्दगी में 1 बार करता है | पर वही काम 1 औरत रोज़ करती है |
एक नार तरवर से उतरी, सर पर वाके पांव ऐसी नार कुनार को, मैं ना देखन जाँव।।
एक नगरी में चौबीस घर दो पास बैठें भर चाव उस नगरी का यही स्वभाव कटें-मरें , लगे न घाव |
वो कोन से सब्जी है. जिसका पहला अक्षर काट दे तो 1 कीमती चीज़ का नाम और अंतिम अक्षर काट दे तो स्वी...
देखी ऐसी नार चतुरंगी घर के बाहर निकले नंगी जा कोई वाके धार को चाखे वो जीवन की आस ना राखे |
सोने को पलंग नहीं न ही महल बनाए एक रुपया पास नहीं फिर भी राजा कहलाए।
पिता ने अपने बच्चे को गिफ्ट देते हुए कहा की इसमें ऐसी चीज है, जब तुजे प्यास लगे तो पी लेना जब भूख ...
लंबा-चौड़ा रूप निराला उजली देह किनारा काला जो धोबिन करती है काम उसका भी वही है नाम |
चार खड़े, दो अड़े, दो पड़े एक-एक के मुहं में दो-दो पड़े |
वह कोन सी सब्जी है जिसमे ताला और चाबी दोनों आते है |
सत्य धर्म का बोझा सहता जितना होता , उतना कहता हाथ के आजू-बाजु फैले पांव में रहते हैं दो थेले |
छोटा था तो नारी था मैं बड़ा हुआ तो नर। नारी का तो कम मोल था नर की बड़ी कदर।