तीन लोक में अनुपम है, जो तीन लोक में सार | उस...
तीन लोक में अनुपम है, जो तीन लोक में सार | उसकी महिमा बढ़ जाती है, जो करता उससे प्यार ||
141 पहेलियां मिलीं
चालाकी से सोचने वाली ट्रिकी पहेलियां
तीन लोक में अनुपम है, जो तीन लोक में सार | उसकी महिमा बढ़ जाती है, जो करता उससे प्यार ||
एक बरस भोजन नहीं पाया, फिर भी भोजन करते थे | भले ही तन को छोड़ दिया हो, वे तो कभी न मरते थे ||
जहाँ वाणी प्रगट वीर की, छः अक्षर का नाम | गौतम जहाँ गणधर हुए, बतलाओ वह धाम ||
चार ड्रायवर एक सवारी, आगे पीछे रिश्तेदारी | नाम बताओ उस गाडी का, जिसमे आए सबकी बारी ||
मुझको लेकर गुन-गुन करते, कुछ सज्जन से लोग | दुर्जन कभी न हाथ लगाते, न करते मेरा उपयोग||
प्रतिवर्ष मै आता हूँ, नई रोशनी लाता हूँ | उत्सव सभी मनाते है, मिलकर दीप जलाते है
पिंडी फटी नाम जपने से, चंद्रा प्रभु प्रगटे उसमे से | भस्मक व्याधि रोग था भारी, नाम बताओ सब नर नारी |...
ताले अड़तालीस डले थे, पहरेदार लिए भाले थे | भीतर बंद किया उन मुनि को, नाम बताओ तुम जन-जन को ||
आठ गुणों को प्राप्त किया है, निराकार पद धार लिया है | अब न उनको आना जग में, लीन रहे निज चेतन में ||
ऐसे इन्द्र का नाम बताओ, चार पैर अरु पूंछ दिखाओ | शत इन्द्रों में आने वाला, इन्द्र की शोभा पाने वाला ...
उजला उजला उसका दाना, उसके बिन न अच्छा न खाना | छ रस में से एक बताया, नाम बताओ उसका प्यारा||
तीन सौ त्रेसठ मत को चलाया, वीर प्रभु का जीव कहाया | आदिनाथके समय में आवे, तीर्थंकर की पदवी पावे||
आदि कटे तो दुःख कहाता, मध्यकटे तो खाया जाता | अंत कटे तो हमें जलाता, पूर्ण रहे तो ज्ञान बढाता ||
दोनों भाई जुड़वाँ आवे, बहिन को देख विरक्ति पावे | कुंथलगिरी से मोक्ष पधारें ,हम सब उनका नाम उचारे ||
जल में जीव बहुत कहलाए, धर्म और विज्ञान बतलाएं | एक बूँद में कितने जीव पाए, जीवों की संख्या आप बताएं ...
अष्टम नारायण कहलाये, महिमा अदभूत आगम गाये | रुक्मणी जिनकी थी पटरानी नाम बताओ कोई ज्ञानी
श्रीपाल को जिसने सताया, और समंदर मे जिसने गिरवाया | नाम बताओ उसका प्यारे,उसी सेठ का नाम उचारे ||
अरिहंतों से सिद्धों तक की दूरी, कितने राजू तक की | हमको बतलाओ जल्दी उत्तर तुमने क्यों देर की ||
पदम् पुराण में राम कथा है, पढ लेंगें तो संसार व्यथा है | लेखक ग्रंथ के हमें बताओ, नाम बताकर ज्ञान बढ...
र मे नित्य विरक्त रहे जो, सिद्धप्रभु का ध्यान करे जो | एक दिवस खुद मुनिपद पाया, अंतर मुहूर्त मे केवल...