णमोकार यह मंत्र है सुंदर, आया प्रथम किस ग्रंथ...
णमोकार यह मंत्र है सुंदर, आया प्रथम किस ग्रंथ के अंदर | लीपिबध यह किसने किया, नाम बताओ जिसने किया ||
141 पहेलियां मिलीं
चालाकी से सोचने वाली ट्रिकी पहेलियां
णमोकार यह मंत्र है सुंदर, आया प्रथम किस ग्रंथ के अंदर | लीपिबध यह किसने किया, नाम बताओ जिसने किया ||
युद्ध देख हो गए वैरागी, कैशलोच गजपर कर अनुरागी || ऐसे महापुरुष का नाम बतलाओ, जैन धर्म की शान बढाओ ||
ऐसे गुरु के चरण पखारू, हृदय कमल पर उन्हें बिठा लू || सीमंधर को नमन किये थे, प्रभुवर से सक्च्चात मिले...
श्रीपाल को जिसने सताया, और समुंदर मे गिरवाया || नाम बताओ उसका प्यारे ,उस सेठ का नाम उच्चारे ||
ऐसे गेट का नाम बताओ, जिससे कभी न कोई गुजरा| बना हुआ हड्डी का है, जिसका रंग है उजला उजला||
ऐसी कौनसी पालिश है, जिसके बनने मे हिंसा होती है| उस पालिश का नाम बताओ, नाम बताकर इनाम पाओ||
कौन सी पत्ती है वह, जिसके पीने मे दोष लगता है| सुबह दोपहर शाम को पी जाती है, सबके मन को भाती है||
हड्डी को जब पीसा जाता, चिकना चिकना सा बन जाता| तुम सब अपने मुख मे लगाते, काले से गोरे बन जाते||
जन्म दिवस पर काम मे आती, लेकिन हिंसा बहुत करवाती| जो भी खाए दांत सडाये, बैचने वाला मौज उड़ाए||
सत्य अहिंसा के अनुरागी, वीतरागता जिनकी नामी| तीस वर्ष में मुनि पद पाया, देवों तक ने उनको गाया ||
काशी में मैं रहू अकेला , कलकत्ता में दो - दो | दिल्ली में नहीं पाओगे तुम , कानपूर में खोजो |
रात हुई तो जनम लिया ,सुबह हूँ मोती जैसी | सूरज देखूं तो मर जाऊं ,मेरी किस्मत कैसी ||
कई कपड़ों के पार हुई एक नहीं सौ बार हुई फिर भी ना बेकार हुई और तेज मेरी धार हुई पूंछ है मेरी तो प...
रूप है काला खून बैगनी ऐसी मेरी फितरत है मेरी चमड़ी लोगों को भाए ऐसी मेरी किस्मत है बारिश में मैं ...
खट्टा मगर रसीला हूं ऊपर से हरा या पीला हूं मेरी खोपड़ी काट के पकड़ो हाथों में मुझको तुम जकड़ो लगा द...
मेरे नाम के दो हैं मतलब दोनों के हैं अर्थ निराले एक अर्थ में सब्जी हूं मैं एक अर्थ में पालने वाले...
लगे मात्रा तो हूं खाक हटे मात्रा तो पक्षी सुरीला काला मेरा रूप कुरूप करे क्या काला मुझको धूप नाम...
नहीं सुदर्शन चक्र मगर मैं चकरी जैसा चलता सिर के ऊपर उलटा लटका फर्श पे नहीं उतरता बर्फ नहीं पर हव...
मेहमानों का स्वागत मुझसे करती मैं खातिरदारी ना मीठी ना खट्टी हूं मैं नमकीन ना मैं तरकारी तरल रूप...
लाल रंग है घर मेरा अंग है सबमें ही मैं पया जाऊं लेकिन तब हो बड़ी मुसीबत जब मैं कहीं बह जाऊं हिंदू...