बन मे दिखती हे वो छेली
बन मे दिखती हे वो छेली उसके पेट मे लटके थेली बच्चे को थेली मे छिपाए वन मे लम्बी कूद लगाए
200 पहेलियां मिलीं
बच्चों के लिए आसान और मजेदार पहेलियां
बन मे दिखती हे वो छेली उसके पेट मे लटके थेली बच्चे को थेली मे छिपाए वन मे लम्बी कूद लगाए
हरी हान्डी मै लाल भात सर पर नाक पेट मै दात भीगा बकरा उसका नाम भूख प्यास का काम तमाम
एक घर मे सोना रखा चान्दी की दीवार जाने को रास्ता नही बाहर से करे पुकार
सापो से भरी एक पिटारी सबके मुख पर भरी चिन्गारी तन कर सोए, नही वो लटके फेके आग जो मुह को पटके
काली गुणवाली बडी रहती मै डाल पर डोल जब मस्ती मै बोलती मिक्ष्री सी देती हू घोल
गर्मी में तुम मुझको खाते, मुझको पीना हरदम चाहते, मुझसे प्यार बहुत करते हो, पर भाप बनूँ तो डरते भी...
मुझमें भार सदा ही रहता, जगह घेरना मुझको आता, हर वस्तु से गहरा रिश्ता, हर जगह मैं पाया जाता
ऊपर से नीचे बहता हूँ, हर बर्तन को अपनाता हूँ, देखो मुझको गिरा न देना वरना कठिन हो जाएगा भरना।
लोहा खींचू ऐसी ताकत है, पर रबड़ मुझे हराता है, खोई सूई मैं पा लेता हूँ, मेरा खेल निराला है।
Bikhari Nhi Par Bikh Mangataa Hai Ladki Nhi Par Purse Isthemal Krta Hai Pujaari Nhi Par Ghanti Bja...
Aisi Kon Si Cheez Hei Jishey Aagey Sey Toh Banayaa Hein Bhagwan Ney Aur Pichey Sey Insaan Ney.
तुम न बुलाओ मैं आ जाऊँगी, न भाड़ा न किराया दूँगी, घर के हर कमरे में रहूँगी, पकड़ न मुझको तुम पाओग...
बेशक न हो हाथ मे हाथ पर जीता है वो आप के साथ बताओ क्या ?
Padhney Mein Likhney Mein Dono Mein Hi Main Aata Kaam Pen Nhi Kagaz Nhi Btaao Kya Hei Mera Naam.
Hari Thi Man Bhari Thi No Laakh Motiyon Sey Jadi Thi Raja Ji Key Khet Mein Duata Odhey Khadi Thi.
उसको सूरज कभी ना भाये अन्धियारे मे निकसत पाये ज्यो ज्यो साप ताल को खाये सूखे ताल साप मर जाय
सत्य धर्म का बोझ सहता जितना होता उतना कहता हाथ के आजू बाजू फेले पाव मे रहते दो थेले
एक थाल मोतियो से भरा सब के सिर पर औन्धा धरा चारो ओर वह थाली फिरे मोती फिर भी एक ना गिरे
सिर पर सिकुडी, आगे छितरी हर घर मे हे सजा शान से चलती धूल उडाती करती काम यह ताजा
एक इन्सान का अचरज भेद हाड हाड मे वाके छेद मोहि अचम्भा आवे ऐसे जीव बसे हे वामे केसे